आमदनी बढ़ाने का छावनी परिषद गढ़ी कैंट ने निकाला नया तरीका
विलंब से टैक्स जमा करने पर लिया जा रहा है 100 रुपये तक का विलंब शुल्क
देहरादून, (न्यूज यूके लाइव डॉट इन)। अपनी कार्यशैली को लेकर हमेशा से ही चर्चा में रहने वाले छावनी परिषद गढ़ी कैंट ने इस बार अपनी आमदनी बढ़ाने का नया तरीका निकाल लिया है। परिषद द्वारा ना केवल लेट टैक्स बिल जमा करने पर ₹100 का बिलंब शुल्क लिया जा रहा है, अपितु उस बिलंब शुल्क पर भी टैक्स लेने की कार्रवाई को मूर्त रूप दिया जा रहा है। हालांकि ऑन लाइन पेमेंट किये जाने पर कुछ छूट देकर राहत देने की कोशिश भी विभाग की और से की गयी है।
अपनी कार्यशैली को लेकर हमेशा से चर्चाओं में रहने वाला छावनी परिषद गढ़ी कैंट इस बार अपनी आमदनी का जरिया बढ़ाने को लेकर सुर्ख़ियों में है। परिषद द्वारा अपने आमदनी का जरिया छावनी परिषद में जमा होने वाले टैक्स बिलों के लेट जमा होने की सूरत में विलंब शुल्क के रूप में बनाया हैं। इतना ही नहीं इस विलंब शुल्क में भी विभाग द्वारा टैक्स लिया जा रहा हैं। यदि किसी ने समय पर टैक्स जमा नहीं किया तो उस सूरत में 100 रुपए विलंब शुल्क लिया जाएगा और इसमें भी एक निर्धारित समय में टैक्स जमा न करने पर विलंब शुल्क व इस विलंब शुल्क पर भी टैक्स विभाग द्वारा लिया जाएगा। छावनी परिषद की यह व्यवस्था इसी वित्तीय वर्ष से शुरू हो भी गयी है।
इसके अलावा छावनी परिषद के द्वारा पानी के शुल्क में भी वृद्धि की गयी है। विदित हो कि पिछले वित्त वर्ष तक किसी तरह का कोई विलंब शुल्क छावनी परिषद के द्वारा नहीं लिया जा रहा था। इधर स्थानीय जनता का कहना था कि यदि वित्त वर्ष के बाद टैक्स जमा करते तो छावनी परिषद के द्वारा विलंब शुल्क लेना जायज था, लेकिन वित्त वर्ष में ही टैक्स जमा करने पर विलंब शुल्क लेना पूरी तरह से गलत है। उधर डिजिटल सुविधा सुनिश्चित करने की उद्देश से इस बार विभाग द्वारा टैक्स नगद न लेकर डिजिटल माध्यम से लिया जा रहा है। इस व्यवस्था में कुछ छूट देकर लोगों को राहत देने की कोशिश छावनी परिषद द्वारा की गयी है। इस बाबत जब CEO तनु जैन से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय द्वारा ही विलाब शुल्क लेने की व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया है, जो कि ई छावनी पोर्टल में ऑटोमैटिक जनरेट होता है। ऐसे में परिषद द्वारा अपने आप विलंब शुल्क व अन्य टैक्स लेने की व्यवस्था शुरू करने की बात गलत है। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा के लिए ही डिजिटल माध्यम से टैक्स लिया जा रहा है।